ईरानी क़ब्ज़े से छूटकर भारत लौटे आठ भारतीय नाविक, परिजनों ने ली राहत की सांस
नई दिल्ली:
पिछले साल दिसंबर में ईरानी अधिकारियों द्वारा क़ब्ज़े में लिए गए समुद्री जहाज़ ‘एमटी वैलेंट रोर’ (MT Valiant Roor) के चालक दल के आठ भारतीय सदस्य आख़िरकार रविवार तड़के वतन वापस लौट आए हैं। महीनों की अनिश्चितता और कूटनीतिक प्रयासों के बाद हुई इस वापसी से नाविकों के परिवारों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
घटना का विवरण:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘एमटी वैलेंट रोर’ नामक इस मालवाहक जहाज़ को ईरानी अधिकारियों ने पिछले साल 8 दिसंबर को कथित तौर पर “समुद्री नियमों के उल्लंघन” के आरोप में अपने क़ब्ज़े में ले लिया था। जहाज़ पर सवार चालक दल के सदस्यों में आठ भारतीय नागरिक भी शामिल थे। तब से ये सभी सदस्य ईरान में ही फंसे हुए थे।
कूटनीतिक प्रयास और रिहाई:
भारत सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) लगातार इस मामले पर ईरानी अधिकारियों के साथ संपर्क में थे। नाविकों की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तरीय कूटनीतिक प्रयास किए गए। भारत में ईरानी दूतावास के साथ भी लगातार बातचीत जारी थी। इन सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप, ईरानी प्रशासन ने नाविकों को रिहा करने का फ़ैसला किया।
भारत वापसी और स्वागत:
रविवार तड़के जब ये आठ नाविक भारत पहुंचे, तो माहौल भावुक हो गया। हवाई अड्डे पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। महीनों बाद अपने अपनों को देखकर कई परिवारों की आंखों में आंसू आ गए। नाविकों ने सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार और विशेष रूप से विदेश मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
सरकार का बयान:
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, विदेश मंत्रालय ने नाविकों की वापसी का स्वागत किया है और ईरानी अधिकारियों द्वारा दिए गए सहयोग के लिए उन्हें धन्यवाद दिया है। मंत्रालय ने दोहराया कि वह विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।
नाविकों के परिवारों की प्रतिक्रिया:
नाविकों के परिवारों के लिए यह वापसी एक बड़ा जश्न है। पिछले कुछ महीने उनके लिए बहुत तनावपूर्ण रहे थे। एक नाविक के पिता ने कहा, “हम भगवान और भारत सरकार के बहुत आभारी हैं। हमें विश्वास था कि हमारे बच्चे वापस आएंगे।”
आगे की कार्रवाई:
फिलहाल नाविकों को कुछ दिन आराम करने और अपने परिवारों के साथ समय बिताने के लिए कहा गया है। समझा जाता है कि विदेश मंत्रालय और जहाज़रानी मंत्रालय इस मामले के विस्तृत पहलुओं की समीक्षा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।








